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*:information_desk_person:🏻🕹 भारतीय मूर्तिकला (भाग -1) (टू द पॉइंट)*
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*:white_check_mark: हड़प्पाकालीन मूर्तिकला*
*:white_check_mark: मौर्यकालीन मूर्तिकला*
*:white_check_mark: शुंग/कुषाणकालीन मूर्तिकला*
*:white_check_mark: गांधार शैली*
*:white_check_mark: मथुरा शैली*
*:white_check_mark: आयाग-पट्ट*
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✍🏻 *_प्राचीन विश्व में कला के क्षेत्र में भारत का प्रतिष्ठित स्थान है। जहाँ एक ओर यवन मानव शरीर की दैहिक सुंदरता, मिस्र के लोग अपने पिरामिड की भव्यता और चीनी लोग प्रकृति की सुंदरता को दर्शाने में सर्वोपरि थे, वहीं भारतीय अपने अध्यात्म को मूर्तियों में ढालने का प्रयास करने में अद्वितीय थे; वह अध्यात्म जिसमें लोगों के उच्च आदर्श और मान्यताएँ निहित थीं।_*

*_पाषाण काल में भी मनुष्य अपने पाषाण उपकरणों को कुशलतापूर्वक काट-छाँटकर या दबाव तकनीक द्वारा आकार देता था, परंतु भारत में मूर्तिकला अपने वास्तविक रूप में हड़प्पा सभ्यता के दौरान ही अस्तित्व में आई।_*

:information_desk_person:🏻:boom: *हड़प्पाकालीन मूर्तिकला*:boom:
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:black_small_square: _हड़प्पा सभ्यता में मृणमूर्तियों (मिट्टी की मूर्ति), प्रस्तर मूर्ति तथा धातु मूर्ति तीनों गढ़ी जाती थीं।_
:black_small_square: _मिट्टी की मूर्तियाँ लाल मिट्टी एवं क्वार्ट्ज नामक प्रस्तर के चूर्ण से बनाई गई कांचली मिट्टी से बनाई जाती थीं।_
:black_small_square: _धातु मूर्तियों के निर्माण के लिये हड़प्पा सभ्यता में मुख्यत: तांबा व काँसा का प्रयोग किया जाता था।_
:black_small_square: _सेलखड़ी पत्थर से बनी मोहनजोदड़ो की योगी मूर्ति (अधखुले नेत्र, नाक के अग्रभाग पर टिकी दृष्टि, छोटा मस्तक व सँवरी हुई दाढ़ी) इसकी कलात्मकता का प्रमाण है।_
:black_small_square: _मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक नर्तकी की धातु मूर्ति (काँसा) भी मूर्तिकला का बेजोड़ नमूना है।_
:black_small_square: _हड़प्पाकालीन दायमाबाद (महाराष्ट्र) से प्राप्त बैलगाड़ी को चलाते हुए गाड़ीवान की मूर्ति भी मूर्तिकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।_
:black_small_square: _मृणमूर्तियों में हड़प्पा काल में मुख्यत: सीटियाँ, झुनझुने, खिलौने और वृषभ आदि बनाए गए।_

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